श्री कालिका हृदय स्तोत्रम

!! अथ श्री कालिका हृदय स्तोत्रम !!

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हं हं हं हंस हँसी स्मित कह - कह चामुक्त- घोराटट-हासा!!
खं खं खं खडग-हस्ते त्रिभुवन-निलये कालिका काल-धारी!!१!!
रं रं रं रंग-रंगी प्रमुदित वदने पिंग-केशी श्माशाने !
यं रं लं तापनीये भाकुटिघट घटाटोप टंकार जापे!!२!!
हं हं हंकार -नादं नर-पिशित-मुखी संघानी साधु-देवी!
ह्रीं ह्रीं कुष्मांड-भुंडी वर वर ज्वलिनी पिंग-केशी कृशांगी !!३!!
खं खं खं भूत-नाथे कीलि कीलि किलिके एहि एहि प्रचंडे !
ह्रूं ह्रूं ह्रुं भूत नाथे सुर गण नमिते मातरम्बे नमस्ते!!४!!
भां भां भां भाव भावैर्भय हन हानितं भुक्ति मुक्ति प्रदात्री!
भीं भीं भीं भीमकाक्षिर्गुण गुणित गुहावास भोगी स भोगी !!५!!
भूं भूं भूं भूमि कम्पे प्रलय च निरते तारयन्तं स्व नेत्रे!
भें भें भें भेदनीये हरतु मम भयं कालिके! त्वां नमस्ते!!६!!
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!! अथ फलश्रुति:!! 
आयु: श्री वर्द्धनीये विपुल रिपु हरे सर्व सौभाग्य हेतु:!!
श्रीकाली शत्रु नाशे सकल सुख करे सर्व कल्याण मूले!!७!!
भक्त्या स्तोत्रं त्रि-संध्यं यदि जपति पुमानाशु सिद्धि लभन्ते!
भूत प्रेतादि रण्ये त्रिभुवन वशिनी रूपिणी भूति युक्ते!!८!!
!! श्रीकाली तंत्रे कालिका हृदय स्तोत्रं सम्पूर्णम !! 

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